शाकाहारी एवं सात्विक भोजन
शरीर, मन और आत्मा की अद्भुत शक्ति का रहस्य
क्या आप जानते हैं…
कि मनुष्य का जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है?
मनुष्य का वास्तविक स्वास्थ्य
तभी पूर्ण होता है
जब शरीर, मन और आत्मा–तीनों संतुलन में हों।
भारतीय संस्कृति में
भोजन को केवल भूख मिटाने का साधन नहीं माना गया,
बल्कि उसे
ऊर्जा, विचार और चरित्र निर्माण की शक्ति कहा गया है।
इसी कारण
शाकाहारी और सात्विक भोजन
को जीवन के लिए
शुद्ध, श्रेष्ठ और शक्तिदायक माना गया।
आज के आधुनिक युग में
जहाँ भोजन केवल स्वाद तक सीमित हो गया है,
वहीं सात्विक आहार
हमें याद दिलाता है-
कि
हम क्या खाते हैं,
यही तय करता है कि हम कैसे सोचते हैं
और कैसे जीते हैं।
सात्विक आहार…
जिसे योगियों का भोजन कहा जाता है-
केवल एक डाइट नहीं है।
यह
जीवन जीने की एक पवित्र पद्धति है,
जो शरीर, मन और आत्मा
तीनों के बीच सामंजस्य स्थापित करती है।
ताज़े फल…
हरी सब्ज़ियाँ…
साबुत अनाज…
दालें…
दूध और घी…
कोई रसायन नहीं,
कोई बनावटी स्वाद नहीं-
सिर्फ प्रकृति की शुद्ध ऊर्जा।
संस्कृत शब्द “सत्त्व” से जन्मा
सात्विक भोजन
शुद्धता, संतुलन
और चेतना का प्रतीक है।
आयुर्वेद कहता है-
मानव शरीर तीन शक्तियों से संचालित होता है-
वात…
पित्त…
और कफ।
जब ये तीनों असंतुलित होते हैं,
तो रोग जन्म लेते हैं।
और जब ये संतुलन में होते हैं,
तो जीवन
ऊर्जा, शांति और स्वास्थ्य से भर जाता है।
सात्विक भोजन
इन तीनों दोषों को संतुलन में लाता है
और भीतर
सद्भाव की अनुभूति कराता है।
अब प्रश्न उठता है-
शाकाहारी भोजन से मनुष्य को ताकत कैसे मिलती है?
शाकाहारी भोजन में
प्रकृति की जीवंत
और सकारात्मक ऊर्जा समाहित होती है।
यह ताकत
तुरंत नहीं,
बल्कि धीरे-धीरे
और स्थायी रूप से
शरीर में बसती है।
दालें…
चना…
राजमा…
सोयाबीन…
उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन,
जो मांसपेशियों को मजबूत
और शरीर को सहनशील बनाता है।
गेहूं…
चावल…
बाजरा…
ज्वार…
प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट,
जो शरीर को
निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
हरी सब्ज़ियाँ और फल…
विटामिन और खनिजों का भंडार,
जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता
को बढ़ाता है।
दूध…
दही…
और घी…
हड्डियों, दाँतों
और स्नायु तंत्र को
मजबूती प्रदान करते हैं।
परिणामस्वरूप-
शरीर में
स्फूर्ति आती है,
कार्य-क्षमता बढ़ती है
और दीर्घकालीन ऊर्जा बनी रहती है।
लेकिन शाकाहारी भोजन
केवल शरीर को ही नहीं,
मन को भी पोषण देता है।
यह भोजन
हल्का और सुपाच्य होता है।
आलस्य कम करता है…
चिड़चिड़ापन घटाता है…
क्रोध को शांत करता है…
मस्तिष्क शांत रहता है,
स्मरण शक्ति बढ़ती है,
एकाग्रता गहरी होती है
और निर्णय क्षमता मजबूत बनती है।
अहिंसा पर आधारित भोजन
मन में
करुणा और संवेदनशीलता
को जन्म देता है।
व्यक्ति का स्वभाव
सौम्य, संतुलित
और सकारात्मक बनता है।
भीतर से
शांति और आत्म-संतोष
का अनुभव होने लगता है।
अब जानते हैं-
सात्विक भोजन वास्तव में क्या है?
सात्विक भोजन
वह है
जो शरीर ही नहीं,
आत्मा को भी शुद्ध करे।
जो ताज़ा हो…
प्राकृतिक हो…
सरल हो…
न अधिक मसालेदार…
न अधिक तला-भुना…
न बासी…
न कृत्रिम…
ताज़े फल…
दूध और दही…
हरी सब्ज़ियाँ…
अंकुरित अनाज…
सादा दाल-चावल…
घी और शहद…
यही है
सात्विक भोजन।
सात्विक भोजन में
अद्भुत शक्ति होती है।
यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है,
शरीर में
विषैले तत्वों को
नहीं बढ़ने देता।
रोगों से लड़ने की
प्राकृतिक क्षमता
बढ़ाता है।
थकान, भारीपन
और सुस्ती
को दूर करता है।
शरीर हल्का,
सक्रिय
और दीर्घायु बनता है।
मानसिक स्तर पर-
मन स्थिर होता है,
विचार स्पष्ट होते हैं।
ध्यान…
योग…
और साधना
स्वतः सहज हो जाते हैं।
नकारात्मक भावनाएँ
धीरे-धीरे
स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
और सबसे गहरी शक्ति-
आत्मिक ऊर्जा।
सात्विक भोजन
आत्मा को ऊँचा उठाता है।
भीतर से
प्रसन्नता उत्पन्न होती है।
जीवन के प्रति
सकारात्मक दृष्टिकोण
बनता है।
और मनुष्य
अपने भीतर छिपी
चेतना और शक्ति
को अनुभव करने लगता है।
अंत में इतना ही-
शाकाहारी और सात्विक भोजन
केवल शरीर को ताकत नहीं देता,
यह
मन को शांति,
विचारों को पवित्रता
और आत्मा को ऊर्जा
प्रदान करता है।
यही भोजन
मनुष्य को ले जाता है-
एक स्वस्थ शरीर,
एक शांत मन
और एक जाग्रत आत्मा
की ओर।
